Riya Dubey
Staff Writer · Amarujala

Image courtesy Amarujala
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले पर चुनाव आयोग और केंद्र से जवाब मांगा। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी व्यवस्था लागू करने के लिए नियमों में बदलाव की जरूरत होगी और इससे सरकारी खजाने पर बड़ा वित्तीय बोझ भी पड़ सकता है। सुनवाई के दौरान उपाध्याय ने खुद अदालत में पेश होकर कहा कि इस व्यवस्था को लागू करने के लिए राज्यों का सहयोग भी जरूरी होगा। शुरुआत में अदालत ने उन्हें पहले चुनाव आयोग के पास जाने की सलाह दी और नोटिस जारी करने के पक्ष में नहीं थी। याचिका में क्या कहा गया?
यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि रिश्वत, अनुचित प्रभाव, फर्जी पहचान , डुप्लीकेट वोटिंग और घोस्ट वोटिंग जैसी समस्याएं अब भी चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता और निष्पक्षता को प्रभावित कर रही हैं, जिससे नागरिकों को व्यापक नुकसान होता है। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में केंद्र, चुनाव आयोग और संबंधित राज्यों के जवाब मिलने के बाद आगे की सुनवाई करेगा। पीठ ने चुनाव आयोग को क्या स्पष्ट करने को कहा?
सुप्रीम कोर्ट फर्जी मतदान पर सख्त: क्या बायोमेट्रिक सिस्टम से मतदान? अदालत ने केंद्र-चुनाव आयोग से मांगा जवाब

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